बाल विवाह एक अभिशाप बताया जाता है सीमावर्ती जिले में बालविवाह नहीं थम रहे है। शादी की बालिकाओं के लिए उम्र 18 साल और लड़कों की 21 साल तय है लेकिन इस उम्र से पहले ही करीब एक लाख शादियां हो जाती है। यह उम्र उनके खेलने कूदने की थी लेकिन विवाह बंधन में बांध लिया गया। 10से 14 की उम्र में करीब 40 हजार और 15 से 18 तक की उम्र में 50 हजार से अधिक ने शादी कर दी है। बालविवाह को लेकर यह आंकड़े काफी भयावह है। तमाम पाबंदियों के बावजूद हो रहे बाल विवाह प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहे है।जिले में एेसे कई इलाके है
जहां शिक्षा के नाम पर आज भी पांचवीं सातवीं तक की पढाई भी मुश्किल से हुई है। इन परिवारों की जानकारी भी प्रशासनिक स्तर पर है लेकिन यहां लगातार जानकारी रखकर बालविवाह रोकने के प्रयास नहीं हो रहे है। आखातीज पर ही यह राग अलापा जा रहा है जबकि अक्षय तृतीया के बाद भी बाल विवाह संपन्न हो रहे है।
