भोपाल. निजी अस्पताल अब मनमाने तरीके से सिजेरियन डिलेवरी नहीं करा सकेंगे। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने अब इस पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। किसी अस्पताल में यदि 50 प्रतिशत से ज्यादा सिजेरियन प्रसव हुए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए निगरानी भी शुरू की जा रही है। निजी और सरकारी अस्पतालों में लगातार बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव को देखते हुए अब स्वास्थ्य संचालनालय ने इसे नियंत्रित करने की तैयारी कर ली है। संचालनालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और सिविल सर्जन को निर्देश जारी किए हैं।स्वास्थ्य संचालक डॉ केके ठस्सू के अनुसार आमतौर पर 80 फीसदी सामान्य प्रसव होने चाहिए और 15 से 20 प्रतिशत तक ही सिजेरियन प्रसव होने चाहिए पर इसका उल्टा हो रहा है। वर्तमान में महिलाएं दर्द नहीं सहना चाहतीं, इसलिए उनके परिजन सिजेरियन करने के लिए दबाव डालते हैं। इसके साथ निजी अस्पताल ज्यादा लाभ कमाने के लिए भी सिजेरियन की सलाह देते हैं। महिला आयोग की अनुशंसा और बढ़ते सिजेरियन प्रसव को देखते हुए अब विभाग ने उसे नियंत्रित करने का फैसला लिया है।
