जयपुर, 14 सितम्बर। शिक्षा राज्य मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि हिंदी राष्ट्रीयता की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यह हिंदी ही है जिसने देश को एकता के सूत्र में बांधे रखा है। उन्होंने भाषा को व्यक्ति की पहचान बताते हुए हिंदी में विज्ञान, तकनीकी, कृषि पर अधिकाधिक लेखन पर जोर दिया।
श्री देवनानी गुरूवार को जवाहर कला केन्द्र में भाषा एवं पुस्तकालय विभाग की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय हिंदी दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत का गौरव है और जरूरत इस बात की भी है कि इसे बोलचाल की सीमाओं तक नहीं बांधकर विश्व भाषा बनाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने हिंदी भाषा के 11 स्वर और 33 व्यंजनाें की चर्चा करते हुए कहा कि यह ऎसी भाषा है जो जैसी बोली जाती है, वैसी ही लिखी जाती है। उन्होंने विश्व पटल पर हिंदी को आगे बढ़ाने, जन-जन के मन में हिंदी का प्रसार करने पर जोर दिया।
शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि विश्व के 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। विश्वभर की कंपनियां अपने उत्पादाें का विज्ञापन हिंदी में करती हैं और इसकी संपन्नता इसी से है कि जातीयता की संकीर्णता से परे इसने देश में अनेकता में एकता को बनाए रखा है। उन्होनें कहा कि राज्य सरकार ने हिंदी की 16 लाख राष्ट्रीयता के भावों की पुस्तकें पुस्तकालयों में पाठकों तक पहुंचाई है। सरकार का प्रयास है कि हिंदी भाषा जन-जन के आचरण का अंग बने।
इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश कोठारी ने हिंदी के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी व्याकरिणक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परम्पराओं के पोषण की वृहद भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी का शब्द संसार विपुल और समृद्ध है।कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. दशोरा ने हिंदी को भारत की संस्कृति बताते हुए कहा कि इसी से देश की नई पीढ़ी को संस्कारित किया जा सकता है।
‘भाषा परिचय’ का लोकार्पण ः
समारोह में शिक्षा राज्य मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने भाषा एव पुस्तकालय विभाग की डॉ. ममता शर्मा के संपादन में प्रकाशित पत्रिका ‘भाषा परिचय’ के विशेष अंक का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि हिंदी से जुड़े विभिन्न आयामों पर पत्रिका में बेहतरीन सामग्री प्रकाशित हुई है।
हिंदी में सर्वाधिक अंक पाने वाले 105 विद्यार्थियों का हुआ सम्मान ः
समारोह में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक परीक्षा में हिंदी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले 105 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
हिंदी सेवा पुरस्कार ः
राज्य स्तरीय समारोह में हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट लेखन के अंतर्गत कहानी संग्रह कायाकल्प के लिए डॉ. शारदा शर्मा को, विज्ञान लेखन के अंतर्गत प्रकाशित पुस्तक ‘जल चिकित्सा’ के लिए डॉ. दुर्गादत्त ओझा को तथा पत्रकारिता की श्रेष्ठ कृति ‘विज्ञापन सिद्धान्त एवं व्यवहार’ के लिए प्रो. रमेश जैन को ‘हिंदी सेवा पुरस्कार – 2015- के तहत 51-51 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
