सात फेरों में उन्होंने भी हर कदम साथ निभाने का संकल्प लिया। साथ-साथ जिए, मुस्कुराए… जीवन के संघर्ष में एक-दूसरे की ताकत बने। अंतिम समय आया तो भी वे मिसाल बन गए। उनके लिए हर आंख नम हो गई। मन श्रद्धा से भर आया। बात हो रही है नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा वार्ड क्रमांक – 11 निवासी परमानंद जाटव और उनकी पत्नी की। गुरुवार को अर्धांगिनी की मौत के बाद 72 वर्षीय परमानंद जाटव ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। हर वर्ग ने उन्हें नम आखों से अंतिम विदाई दी। वृद्ध परमानंद को जैसे ही पता चला कि जीवनसंगिनी ने बीच राह साथ छोड़ दिया, वे भी सदमे में आ गए। लोगों ने समझा कि शोक की वजह से वे खामोश हैं। लेकिन मामला कुछ और था शायद जीवनसाथी का इस तरह छोड़कर चले जाना परमानंद को मंजूर नहीं था। गम में वे भी अचेत हो गए। डॉक्टर ने नब्ज देखी तो पता चला कि परमानंद भी अब दुनिया में नहीं रहे। जाटव परिवार का दुख दोगुना हो गया। जिसने सुना वही यहां दौड़ा चला आया। हर आंख में आंसू और जुबान पर दोनों की एक साथ मृत्यु की अजब कहानी थी।
