स्वामी प्रतापपूरी महाराज ने बताया कि धारा प्रवाह को निरंतर बहते रहने देना चाहिये । मनुष्य जीवन नर नारायण की देह है आत्मा परमात्मा का स्वरूप है मानव को चिंता नही चिंतन करना चाहिए ।आज वर्तमान में मनुष्य की जीवन शैली में अनेकों बदलाव आ गए हैं जब श्रष्टि की रचना हुई जब मानव पैदा हुआ । हमें गर्व होना चाहिए कि हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है जहाँ देवताओं का वास है मनुष्य का ज्ञान गर्भ का ज्ञान होना चाहिए । रावल किशन सिंह ने बताया कि ध्यान के साथ रामायण का पाठ भावना प्रदान करता है संस्कारों का ज्ञान होना चाहिए समाज का भौतिक वाद की अग्रसर होने से रिश्तों व संस्कारों, संस्कृति का पतन हो रहा है ।
कथा में आसोतरा धाम तुलसाराम महाराज , परेऊ महंत ओंकार भारती महाराज , भजन गायक प्रकाश माली , विरमाराम प्रजापत , कमल रांकावत , राधेश्याम राठी , चन्दनसिंह संदेसरा सहित श्रोता उपस्थित थे ।
मुरलीधर महाराज ने की बड़ी घोषणा – रामकथा वाचन के दौरान मानस कथाकार मुरलीधर महाराज ने जसोल धाम में प्रत्येक दूसरे वर्ष में रामकथा का वाचन करने की घोषणा की ।
