गतिविधि से जोडऩे का आहवान किया था। इस अवसर पर प्राचार्य अर्जुनराम पूनिया ने कहा कि गायन एक ऐसी क्रिया है जिससे स्वर की सहायता से संगीमय ध्वनि उत्पन्न की जाती है और जो सामान्य बोलचाल की गुणवत्ता को राग और ताल दोनों के प्रयोग से बढ़ती है। एकल गायन प्रतियोगिाता में छात्राओं ने देशभक्ति, लोकगीत व हिन्दी सिनेमा के सुन्दर नगमों की प्रस्तुती दी जिसमें बी.ए. अंतिम वर्ष की छात्रा माया आर्य ने तुझसे नाराज नही ऐ जिन्दगी हैरान हूँ मैं प्रथम स्थान, बी.एस.सी. द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रेरणा पाहुवानी ने ‘‘मस्त कलन्दर’’ द्वितीय व बी.एस.सी. प्रथम वर्ष की छात्रा मैना चौधरी ने ‘‘ न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम की सुन्दर प्रस्तुती देकर तृतीय स्थान पर रही । इसकी डॉ. संजय माथुर कल्पना माथुर व श्रीमती चित्रा निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे। खेल प्रभारी डॉ. कमलदेव चौधरी ने बताया कि क्रिकेट प्रतियोगिता में कला संकाय बी ने कला संकाय ए को हराकर फाइनल प्रतियोगिता जीती इससे पूर्व खेले गये दो अन्य मैचों में कला संकाय ए ने विज्ञान संकाय व कला संकाय बी ने वाणिय संकाय को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। मैच में डॉ. संजय माथुर व गुलाबदास वैष्णव ने एपायर की भूमिका निभाई। महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्तर्गत स्वामी विवेकानन्द जयन्ती भी मनाई गई। प्राचार्य अर्जुनराम पूनिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि स्वामी विवेकानन्द अपनी अल्पायु में भी देश के युवाओं के लिये सषक्त कार्य किये वे भारतीय सन्यासी के रूप में विदेष घूमते हुए भारत की संस्कृति व भाषा को बढ़ावा देते रहे। प्रभारी डॉ. राजकुमारी रूपचंदानी ने कहा स्वामी विवेकानन्द के युवाओं को कहे शब्दों को आगे बढ़ों, बढ़ते रहो जब तक की आपका लक्ष्य पूर्ण नहीं होता। उन्होने अपने छोटे से वाक्य में युवाओं में गागर में सागर जैसा संदेश दिया। जयन्ती के उपलक्ष में स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर निबंध प्रतियोगिता व पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
कन्या महाविद्यालय मे सह शैक्षणिक गतिविधियों ‘‘ इन्द्रधनुष’’ के अन्तर्गत तीसरे दिन एकल गायन व क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित
बालोतरा। डी.आर.जे. राजकीय कन्या महाविद्यालय मे सह शैक्षणिक गतिविधियों ‘‘ इन्द्रधनुष’’ के अन्तर्गत तीसरे दिन एकल गायन व क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गुलाबदास वैष्णव ने कहा कि गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है, आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे है। वैज्ञानिक पृथ्वी के समस्त चेतन तत्वों पर पडऩे वाले संगीत के प्रभाव का अनुसंधान करने में जुटे हुए है जबकि हमारे वैदिक ऋषियों ने संगीत के समस्त प्रभावों को पहले ही जान लिया था तथा गायन को जीवन की प्रत्येक
